gharelu nuskhe for increase sperm count in hindi

gharelu nuskhe for increase sperm count in hindi, हिंदी में शुक्राणु बढ़ाने के घरेलू नुस्खेशुक्राणुओं की कम संख्या, शुक्राणु गतिशीलता में कमी और बड़ी संख्या में विकृत या असामान्य शुक्राणुओं का होना पुरुष बंध्यत्व के प्रमुख कारण हैं। विभिन्न पर्यावरण सम्बन्धी और जैविक कारक शुक्राणु संख्या  को प्रभावित करते हैं। आयुर्वेद में शुक्राणुओं की संख्या और शुक्राणु गतिशीलता बढ़ाने और इस प्रकार पुरुषों की प्रजनन क्षमता में वृद्धि करने के कई तरीकों को समझाया गया है। शुक्राणुओं की संख्या में वृद्धि के लिए कई प्रभावी आयुर्वेदिक दवाएं उपलब्ध है. (Read this article in ENGLISH Ayurvedic Medicine for Sperm Count Increase Naturally)
शुक्राणुओं की कम संख्या के कारण और प्राकृतिक तरीकों से शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने के उपायों को नीचे समझाया गया है। यह लेख इस सवाल का जवाब देता है कि स्वाभाविक व प्राकृतिक रूप से शुक्राणुओं को कैसे बढ़ाया जाए।
शुक्राणु बढ़ाने के घरेलू नुस्खे
टेस्टिकल्स / अंडकोष के तापमान को कम करें: जब अण्डकोशों का तापमान बढ़ता है तो शुक्राणुओं की संख्या कम हो जाती है (टेस्टिकल्स को गर्म होने से रोककर – कम शुक्राणुओं की समस्या पर काबू पायें, पढ़ें  )। तंग पैंट, अंडरवियर, गर्म पानी के शॉवर, सॉना इत्यादि अंडकोशों का तापमान बढ़ाते हैं। इन कारणों का निवारण करने से शुक्राणुओं की संख्या में वृद्धि होती है। नहाने के बाद ठंडे पानी से अंडकोशों को धोना, शुक्राणुओं की संख्या और उनकी गतिशीलता में वृद्धि करने में, सहायक होता है। साइकिल की सवारी से भी बचें क्योंकि इससे अंडकोशों पर चोट या आघात का भय रहता है।
अपना वजन कम करें: पुरुषों में शरीर के वजन में वृद्धि हार्मोनल असंतुलन का कारण बनती है और टेस्टोस्टेरोन का स्तर घटाती है (क्या वजन घटाने से पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ता है? पढ़ें  )। वजन घटाने से इस स्थिति को दूर करने में मदद मिलती है। अधिक टेस्टोस्टेरोन शुक्राणुओं की संख्या में वृद्धि करता है। मोटे लोगों में, बैठते समय पेट की वसा की परतें अंडकोशों को ढक लेती हैं। इस वजह से अंडकोष का तापमान बढ़ता है। इसलिए मोटे लोगों के मामले में लंबे समय तक बैठने से शुक्राणुओं की संख्या कम हो सकती है। लंबे समय तक बैठने वाले अधिक वजन के व्यक्तियों को सलाह दी जाती है कि वे समय-समय पर विराम लेते रहें और 10 से 15 मिनट के लिए पैदल चलें। यह शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने और वजन कम करने में मदद करता है।
वाजीकरण थेरेपी अपनाएँ: महिलाओं की प्रजनन क्षमता उनकी उम्र के साथ-साथ कम होती जाती है। इसी तरह पुरुषों में भी शुक्राणुओं की गुणवत्ता और गतिशीलता उनकी उम्र के साथ-साथ कम होने लगती है। आयुर्वेदिक वाजीकरण चिकित्सा का उपयोग करके पुरुषों में बुढ़ापे की प्रक्रिया को धीमा किया जा सकता है। वाजीकरण थेरेपी  पुरुष प्रजनन प्रणाली को फिर से जीवंत कर देती है और वृद्धावस्था की प्रक्रिया को मंद करती है। यह शुक्राणुओं की गुणवत्ता और मात्रा को भी बढ़ाता है जिससे प्राकृतिक रूप से शुक्राणुओं की संख्या और शुक्राणु गतिशीलता स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है.
व्यसनों को न कहें: शराब, भांग-गांजा, तम्बाकू आदि शुक्राणुओं की संख्या और शुक्राणुओं की गतिशीलता को 50% तक कम कर सकते हैं। इन व्यसनों से दूर रहना शुक्राणुओं की संख्या और शुक्राणु गतिशीलता को बढ़ाने में मदद करता है।
तनाव-मुक्त रहें: तनाव, चिंता, जैसे मनोवैज्ञानिक कारण भी शुक्राणुओं की संख्या पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। योग और ध्यान को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनायें और इन नकारात्मक प्रभावों से दूर रहें। योग और ध्यान सबसे अच्छे तनाव-नाशक हैं। इन मनोवैज्ञानिक कारकों को कम करने से शुक्राणु संख्या को बढ़ाने में मदद मिलती है।
आयुर्वेदिक तेलों द्वारा शारीरिक मालिश करें: नियमित रूप से हर्बल तेल से अपने शरीर की मालिश करें। औषधि-मिश्रित हर्बल तेलों से मालिश करने से कामेच्छा, रक्त परिसंचरण और सामान्य स्वास्थ्य में फायदा होता है। हर्बल तेल से शरीर की मालिश करने को अभ्यंग कहा जाता है। अभ्यंग उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करता है, स्वास्थ्य को बेहतर करता है, कामेच्छा बढ़ाता है, रक्त परिसंचरण को अच्छा करता है और मांसपेशियों को मजबूत बनाता है।
ताजा फल-सब्जियां का प्रयोग करें: ताजा सब्जियों, फलों और सूखे मेवों से युक्त पोषक समृद्ध आहार करें। मसालेदार और कड़वे खाद्य पदार्थों से बचें। रोजाना 12-15 गिलास पानी पीकर अपने शरीर को तरोताजा रखें।
जल्दी-जल्दी स्खलन से बचें: जल्दी-जल्दी वीर्यपात करना शुक्राणु संख्या में कमी का कारण बन सकता है। इसलिए अत्यधिक और कम अंतराल में अधिक बार सेक्स और हस्तमैथुन से बचें। 2 स्खलनों के बीच 3-4 दिनों के अंतराल से शुक्राणुओं की संख्या अच्छी बनी रहती है।
अपनी आंत्र को साफ रखें: अपच के कारण बनने वाले विषाक्त अम /आंव वीर्य (शुक्र ) के रास्ते (स्रोत) को अवरुद्ध कर सकते हैं और शुक्राणुओं को कम कर सकते हैं। इसलिए ऐसे खाद्य पदार्थों से दूर रहें जो पचने में मुश्किल होते हैं और कब्ज पैदा करते हैं. इससे शुक्राणुओं की संख्या सामान्य बनी रहने में सहायता मिलती है।
सूखे फलों व मेवों का प्रयोग करें: अखरोट, खजूर, किशमिश और अंजीर शुक्राणुओं की संख्या और गतिशीलता में सुधार करते हैं। इन सभी सूखे मेवों को एक जार में मिलाकर रख लें और रोजाना इस मिश्रण की एक मुट्ठी खाएं। (Read Best Dry Fruits to Increase Sperm Count  )
अपने आहार में प्याज (Read Ayurveda medicinal properties of onion )  और लहसुन (Read Garlic Milk Health Benefits and Recipe  ) शामिल करें: प्याज और लहसुन यौन तंत्र को बेहतर बनाने के लिए जाने जाते हैं. ये शुक्राणुओं की संख्या और उनकी गतिशीलता में सुधार करने में मदद करते हैं। आप इन्हें कच्चे भी खा सकते हैं या पका कर भी इनका सेवन कर सकते हैं।
दूध (Read Magnificent Milk – An ayurveda view )  और दुग्ध उत्पादों का उपयोग करें: दूध और घी (Read Properties of ghee (Clarified butter) as described in Ayurveda ) , दही (Read Medicinal properties of Curd- as explained in ayurveda ), मक्खन (Read Ayurveda Says Butter is Better ) आदि दूध से बने उत्पादों का सेवन पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है और शुक्र धातु को पुष्ट करता है। इन्हें अपने आहार में अवश्य प्रयोग करें।

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